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Intejaar - Madhusudan Singh
है कहाँ खुशी मुझको इतनी, जितनी है तुझे हँसाने में, मिल जाती है जन्नत मुझको, जानम तेरे मुश्काने में। चढ़ पवन गति से आ जाओ, दिल खोल के बैठा दरवाजा, खुशबू से भर दूँ मैं राहें, हूँ गुलशन का मैं शहजादा, मैं फूल बनूँ बिछ जाऊंगा, आंगन में,घर में कण-कण में, क्या खुशीयाँ दे दूँ …