madhureo.com
Insan aur Singhashan (Part..2) - Madhusudan Singh
Click here to read part..1 मैं एक अदना सा इंसान, सदियों से मेरी एक उलझन,रोटी,कपड़ा और मकान, मैं एक अदना सा इंसान। कर देकर भी मुक्त हुए ना, हम सब पहली बार, कोड़ों की बरसात हुई थी, हम पर पहली बार, नंदबंश का राजा था वह, धनानंद था नाम, मानव को मानव ना समझा, मुश्किल …