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AYODHYA/अयोध्या - Madhusudan Singh
Image Credit : Google वर्षों से प्रभु राम जहाँ दिन-रात गुजारे टाट में, वाह रे भारत के वासी हम सोते कैसे ठाट में। इक्ष्वाकु की आन अयोध्या, रघुकुल की अरमान अयोध्या, स्वर्ण लंक को त्याग दिया उस प्रभु राम की जान अयोध्या, जिसका ना दुश्मन दुनियाँ में, नफरत ना जिसको दुनियाँ में, बरसाता जो प्रेम …