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HAA HAM JANTA HAIN - Madhusudan Singh
Image Credit Google हम जनता हैं, वैसा ही जैसा कल थे, मगर अपनी व्यथा किसे सुनाएँ, कुर्बानी तो हमने भी दी थी, मगर जख्म किसे दिखाएँ, हम कल भी रोते थे, आज भी तड़पते हैं, तेरे नियमों की चक्की, सदियों से पिसते है, आदत सी हो गई है, कल ताकत का दौर था, राजतंत्र था,तब …