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Dilemma/दुविधा - Madhusudan Singh
Image Credit :Google साथ मधुर अनजान सफर था, कहीं बिछड़ ना जाये डर था, नई-नई थी डगर मगर पग बढ़ते जाते पल-पल,पल-पल दुविधा में था मन हिचकोले लेता चलता पल पल,पल-पल।। नया-नया संसार मिला था, ठहरे जल को धार मिला था, चाल समझ ना मन का पाए, विवस रोक ना खुद को पाए, पतझड़ पर …