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DHARM AUR DESH/धर्म और देश - Madhusudan Singh
Image Credit : Google वतन ने लाखों शासक देखे, सरहद नए सिंघासन देखे, जब-जब धरती चीख उठी फिर, धर्म के ऊँचे आसन देखे, देखा है धर्मांध गरजते, धर्म के पाँव ना कभी उखड़ते, रावण,कंस,हिरणकश्यप को, देखा है किस हाल में मरते, देखा सरहद घटते,बढ़ते,शासक की शमशीर से, मिट गए धर्म मिटाने वाले दुनियाँ की तस्वीर …