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DEEPAWALI प्रकाशपर्व - Madhusudan Singh
आ मिलजुल हम दीप जलाएँ, अंतर्मन को हम चमकाएँ, करें सफाई घर संग मन को, आज दिवाली है, आओ जग को चमकाएं हम आज दिवाली है।2 कार्तिक काली रात अमावस, खुशियाँ लेकर आई है, दीप जले चहुँओर अवध, मानो पूर्णिमा छाई है, छटी घटा गम खुशियाँ आई, अंतिम दिन वनवास की आई, लंक विजय घर …