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Dagaa/दगा - Madhusudan Singh
Image credit: Google हैं कहते तेरे शब्द और कुछ, आंखे कहती और, बता सच किसको मानूं, प्रेमी या छलिया यार, बता क्या तुमको मानू? चढ़ पवन पर आये हम, सब छोड़ के लाज,शरम, खुशबू राहों में होंगी, होगा गुलशन सा मन, ठगा मैं खुद को जानूँ, दहलीज पर आकर मंजिल के, है ख्वाब,हकीकत और, बता …