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Chudiyan/चूड़ियाँ - Madhusudan Singh
कितनी रंगीन रहती हैं चूड़ियाँ, डब्बों में कैद रहती हैं चूड़ियाँ, खनकती कलाई में सजकर के फिर भी, कई दर्द जीवन मे सहती हैं चूड़ियाँ।। खाते मरोड़ जब कलाई तड़पती, टूटकर के पल में जमीं पर बिखरती, सिसकता है जब कोई तन्हां भवन में, संग,संग उसके सिसकती हैं चूड़ियाँ, कई दर्द जीवन मे सहती हैं …