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CHAAHAT/चाहत - Madhusudan Singh
Image Credit : Google कुछ आज छोड़ गए,कुछ कल छोड़ जाएंगे, नश्वर है सबकुछ यहाँ, एकदिन हम भी छोड़ जाएंगे, ये हम कौन, मालूम नहीं, जिह्वा को स्वाद चाहिए, शरीर को आहार चाहिए, आँखें देखने को कहती हैं, कानों को वो धुन चाहिए, त्वचा को स्पर्श,साँसों को खुशबू, और हमें,वो चाहिए, जो हँसाता है,रुलाता भी …