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Bibastaa - Madhusudan Singh
Image Credit :Google लोकतंत्र है विवश सिसकता देख तड़पता मानव पर, देख प्रतिभा झुलस रही है,जातिवाद के पावक पर। भूखी नंगी लोग सड़क पर उड़ती गड्डियाँ ठुमकों पर, तरस रहे हम छत को कब से नेता सोये मखमल पर, राशन कार्ड और सब्सिडी को लूट लिए महलोंवाले, दूध की नदियाँ सुख चुकी हर मोड़ खड़े …