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Betiyan - Madhusudan Singh
बेटियाँ, बेटियाँ, बेटियाँ, आधी आबादी संसार की, जिसपर, कुछ संरक्षक धर्म और समाज के, पाँव में बेड़ी लगाया है, अस्तित्व जो पुरुषों की, उसको, घूंघट और बुर्का पहनाया है, वैसे तो कल भी, कुछ बेटियों को आजादी थी, बहुत सी बेटीयों पर आज भी, और कल भी, पुरुष मानसिकता हावी थी, बावजूद, जब-जब मौका मिला, …