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Beti Ka Janm                                              (Part-2) - Madhusudan Singh
OpClick here to read part-1 Cont.—–part-2 एक डाल पर गुलशन में दो कलियाँ है मुश्कायी, बधाई हो बधाई घर में जुड़वा बिटिया आई। गूंज उठी किलकारी से, आंगन में रौनक आयी, आँगन में दो सजे खटोले, बिटिया लगन लगाई, शनैः-शनैः दिन गुजर रहे थे, रूप रंग भी निखर रहे थे, साथ में सोना,खेल,पढ़ाई, कदम ताल …