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Beti Garib ki/बेटी गरीब की - Madhusudan Singh
Image credit: Google घर में दो वक़्त का है निवाला नहीं, हाय बिटिया जवाँ हो रही है, तन हैं चीथड़ों की शोभा बढ़ाते मगर, कैसे विकसित जहाँ हो रही है |1 है वो मासूम बिलकुल जगत से अलग, तन निखरते,उमर से है वो बेखबर, झाकतें तन लिबासों में ना छुप रही, टूटे सीसे में अपनी …