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Prarthna - Madhusudan Singh
मेरा कोई ना सहारा भगवान्,खड़ा हूँ मैं जहान में तेरे, बड़ा बिचलित हुआ है इंसान,खड़ा हूँ मैं जहान में तेरे। तेरा ही रूप इंसान नहीं सोंचता, जाति और धर्म में जहान को है तौलता, मेघ,जल,सूर्य और जमीन,आसमान में, पेड़,पहाड़,नदी तू ही है शशांक में, प्रभु तू ही बसा है रेगिस्तान,खड़ा हूँ मैं जहान में तेरे, …