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Bebasi - Madhusudan Singh
Image credit: Google उस पार है तू इस पार हूँ मैं,अब कैसे तुझे बुलाऊँ मैं, सौतन बैरी बिकराल नदी,है बीच में कैसे आऊं मैं, तन भीगा दिल में आग लगी, मिलने की मन में प्यास जगी, दिल करता उड़कर आऊँ मैं, पर पंख कहाँ से पाऊं मैं, बरसों की तड़प है बीच में नद, दुरी …