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Bandhan/बन्धन - Madhusudan Singh
प्रेम तो बहती नदियों के जल की तरह है कहीं भी जा सकता है, ये अलग बात है कि लोग सारे प्रेम में बस एक ही रिश्ता देखते हैं, बन्धन इंसानों को बाँध सकती है उनको मौन कर सकती है मगर दिल को नहीं। !!!मधुसूदन!!! prem to bahatee nadiyon ke jal kee tarah hai kaheen …