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Bahrupiya kahun yaa Paalanhaar/बहरूपिया कहूँ या पालनहार - Madhusudan Singh
Image Credit:Google धर्म नहीं है प्यारा कोई जात नहीं है प्यारी, हम ये जानते हैं, क्या है चाल तुम्हारी सब पहचानते हैं। तेरा बस एक ख्वाब सियासत करना है, जैसे भी हो सिंघासन पर रहना है, खुली आँख या पलके बंद,अंतर्मन में चलता द्वंद्व, कैसे अपनी क्षुधा मिटाएँ,कहीं निकल ना जाए दम, उलझ गए रोजी-रोटी …