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BAARAAT/बारात - Madhusudan Singh
Image Credit : Google कैसी ये बारात सजी है देखो जी, दूल्हों की अम्बार लगी है देखो जी। सबकी बस एक सोच सियासत करना है, जैसे भी हो कुर्सी हासिल करना है, ख्वाब सभी की देख एक बन आई है, समझ इसे अब दुल्हन भी घबराई है, रण जारी लाचार महि है देखो जी, दूल्हों …