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Apnaa Gaon - Madhusudan Singh
कितना प्यारा था अपना जहान यारो, कहाँ छोड़ आए अपना ओ गांव यारों । कितना भटके हैं हम,फिर भी तरसे है मन, हर ख़ुशी है मगर कितना तन्हा हैं हम, एक डब्बे में सिमटा जहान यारो, कहां छोड़ आए अपना ओ गांव यारो। आम अमरुद की डाली कहाँ खो गयी, देख होठों की लाली कहाँ …