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Anokhe Prem ka Dand - Madhusudan Singh
Images credit: Google कैसे कहूं आज कितना, ख़ुशी का दिन है, मानो चौदह वर्षों बाद, कोई मिलन का दिन है, मन में हजारों भाव, मानो मशीन लगी हो पाँव, तीन बजे सुबह से ही छटपट, पसीने से लतपथ, घर को सजाती, मन पसंद ब्यंजन बनाती, पता है आने का समय फिर भी, किसी भी आहट …