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ANKAHA/अनकहा - Madhusudan Singh
उम्र ढले फिर भी मैं कच्चा, मेरा दिल अब भी है बच्चा, कभी हँसूँ कभी नीर बहाऊँ, जहाँ दिखाने को मुस्काऊँ, फिर भी कैसे उसने जाना, हँसने पर भी गम पहचाना, पूछ दिया आखिर क्या गम है, तेरी ये आँखें क्यों नम है, टूट गए जो बाँध बंधे थे, दिल में जो तूफान दबे थे, …