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AKROSH/आक्रोश - Madhusudan Singh
Image Credit : Google बदल गई कानों की बाली,उजड़ गई माथे की लाली, साड़ी,चूड़ी,कंगन बदले,बिखर गई पाँवों की लाली, पलभर में सब ख्वाब बिखर गए, देहरी सुना बाग उजड़ गए, आँखों से अंगारे बरसे, धरती,सूरज,तारे गरजे, हृदय चीरकर चीख निकलती, गरज-गरज कर सबसे कहती, रख चूड़ी अब खड्ग थमा दो, हमको भी रणक्षेत्र दिखा दो, …