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Adhure Khwaab - Madhusudan Singh
बरसों बाद उनको याद आयी गुलशने जिंदगी बहार आयी, चुप थे लब खामोश आँखे थी, कैसे उनको हमारी याद आयी।1 भूल से ओ गली में आ बैठे, या जलाने का कोई इरादा था, या तरस थी मेरी उनकी आँखों में, कैसे उनको हमारी याद आयी।2 सिलवटें जो निशान छोड़ा था, कतरा-कतरा को हमने जोड़ा था, …