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Quote..29 - Madhusudan Singh
वे ठान लिए है दूर जाने को, और मैं निभाने को, वे ठान लिए हैं रुलाने को, और मैं हँसाने को, प्रेम भी अजीब है, वे ठान लिए हैं सबकुछ मिटाने को, और मैं उनकी यादों को, लेखनी में सजाने को।। कतरा-कतरा दर्द मेरे शब्दों में ढलते रहे, कोरे कागजातों को रंगीन करते रहे, कहता …