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Dastaan Aurat ki - Madhusudan Singh
ख्वाब सजाती मन में लाखों,दुनियाँ अपनी त्याग के, नयी नवेली दुल्हन आयी सिर पर घूँघट डाल के| गुलशन की एक शोख कली, गुलशन में खुशियां उससे थी, हंसी,ठिठोली आंगन में, पायल की छमछम उससे थी, उस गुलशन में आज है मातम, गुलशन नयी चली संग साजन, आंगन सुना छोड़ चली,माँ-बाप से नाता त्याग के, नयी …