literatureinindia.com
जीवनसंगिनी – मनीष कुमार
संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी रुको नहीं थको नहीं ओ मेरी हृदयनयनी अपलक नयनों के तार जुड़े हैं तेरे मेरे सांसों को बेजार मत करो मृगनयनी संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी आसमान की ऊंचाई से , जीवन की गहराई तक धूप…