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मैंने देखा है बुद्ध तुम्हें
मैंने देखा है बुद्ध तुम्हें यूं पेड़ों की औट में छुपकर सोते हुए जागती आंखों से ताकते मानुष और छदम भूख् में उजड़े उदास चेहरों पर उभरी विभत्स झुर्रियों से डरकर,मैनें देखा है बुद्ध तुम्हें यूं नदियों मे…