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असलियत मैं भी जानती हूँ…… और तुम भी
उदास रात रात का हर पहर ढल गया चाँद खिड़की से आगे निकल गया ख्वाबों का माला बिखर गया और मनका नैनों से फिसल गया।। नसीब की चादर क्यों झीनी है मेहनत की सुगंध भीनी-भीनी है कोई रफ्फू का हुनर सिखा दे हमें म…