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किसान हूँ, आत्महत्या मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है…
हाँ साहब! मैं वही हूँ जिसने धरती का सीना फाड़, अपने पसीने से सींच वो फ़सल उगाई है जो आज आपके थालियों की शोभा बढ़ा रही हैं| मैं वही हूँ जो चिलचिलाती धूप में, बिलबिलाते से खेतों में कीचड़ से सने हुए अपने…