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चन्द्रमा की चाँदनी से भी नरम – रमाकांत अवस्थी
चन्द्रमा की चाँदनी से भी नरम और रवि के भाल से ज्यादा गरम है नहीं कुछ और केवल प्यार है ढूँढने को मैं अमृतमय स्वर नया सिन्धु की गहराइयों में भी गया मृत्यु भी मुझको मिली थी राह पर देख मुझको रह गई थी आ…