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दर्द दिया है – गोपालदास “नीरज”
दर्द दिया है, अश्रु स्नेह है, बाती बैरिन श्वास है, जल-जलकर बुझ जाऊँ, मेरा बस इतना इतिहास है ! मैं ज्वाला का ज्योति-काव्य चिनगारी जिसकी भाषा, किसी निठुर की एक फूँक का हूँ बस खेल-तमाशा…