literatureinindia.com
पिता – असीमा भट्ट
शाम काफी हो चुकी है पर अँधेरा नहीं हुआ है अभी हमारे शहर में तो इस वक्त रात का सा माहौल हो जाता है छोटे शहर में शाम जल्दी घिर आती है बड़े शहरों के बनिस्पत लोग घरों में जल्दी लौट आते हैं जैसे पंछी अपन…