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आलोचक अज्ञेय की उपस्थिति – कृष्णदत्त पालीवाल
अज्ञेय के आलोचना कर्म की गहराई और व्यापकता पर एकाग्रता से मन को केंद्रित करने की आवश्यकता है, जबकि उनके इस पक्ष की हिंदी आलोचना में घोर उपेक्षा की गई है। प्रायः उनके चिंतन को पश्चिम की घटिया नकल कह…