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ग़ज़ल – मनीष कुमार ‘सुमन’
लोग कहते हैं वो यहीं का है, ग़म से बिखरा हुआ है वो, बेबसी का है। कल तलक आसमाँ में उसके ही चर्चे थे, गौर से देख लो, आज वो जमीं का है। किसलिये नफ़रतें हैं फैली यहाँ, आदमी दुश्मन आदमी का है। किसने किये …