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क्यूँ डरते हो?
Wrote an impromptu poem long time back while editing this picture I clicked: क्यूँ डरते हो जलने से? क्यूँ बुझने देते हो अपनी लौ ‘लोग क्या कहेंगे?’ की फूंक से? लोग तो कुदरत में भी कमी नि…