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ढूंढता रहा…
ता उम्र फकत एक ख़्वाब ढूंढता रहा, हमसफर, ऐ ज़िन्दगी, तुझसे खराब ढूंढता रहा। जाने कितनी ही महजबीन आई मेरे सामने, और मैं आसमां में माहताब ढूढ़ता रहा। अनगिनत ही मिलते रहे जाम मुझको इश्क़ के, और मैं बदनसीब…