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नारी की इच्छा। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ∗ नारी की इच्छा। ∗ असंभव के विरुद्ध:- “नारी की इच्छा” हम समझ क्यों नहीं पाते? “तुम तो नदी की धारा के साथ दौड़ रहे हो। उस सुख को कैसे समझोगे, जो हमें नदी को देखकर मिलता है।” – रामधारी सिंह ‘दिनकर’ मैं जब बच्ची थी। पेड़ पर चढ़ने को मचलती, मां डांटती कहती …