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कौन हो तुम। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ कौन हो तुम। ϒ तंग गलियों से होकर – गुज़रता है कोई। आहिस्ता-आहिस्ता॥ फटा लिबास ओढ़े – कहता है कोई। आहिस्ता-आहिस्ता॥ पैरों में नहीं चप्पल उसके। काँटों भरी सेज पर – चलता है कोई। आहिस्ता-आहिस्ता॥ आँखें हो गई हैं अब – उसकी बूढ़ी। धँसी हुई आँखों से – देखता है कोई। आहिस्ता-आहिस्ता॥ एक …