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वृक्ष का रुदन। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ वृक्ष का रुदन। ϒ मैं वृक्ष अभी हूं नन्हा सा। मै अभी ही जग मे आया हूं। मन में सिंचित उत्साह लिए। बस बढ़ने को ललचाया हूं॥ ना फिक्र अभी मुझको कल की। ना दुखता सा अतीत मेरा। मुझे वर्तमान मे जीना है। कुछ ऐसा ही है प्रीत मेरा॥ मैं मस्त हू अपने …