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सुलगी "हसरतों" की राख उड़ाती...। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ सुलगी “हसरतों” की राख उड़ाती…। ϒ .. वो “औरत” दौड़ कर रसोई तक, दूध बिखरने से पहले ही बचाती है। उन कामयाब मामूली से लम्हों में, अपने बिखरे “ख्वाबो” का गम भूलाती है। सुलगी “हसरतों” की राख उड़ाती और रोटी जलने से पहले हटाती है। एक कप सम्हाल टूटने से बचाकर, अपने …