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उड़ने की ख़ातिर। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ उड़ने की ख़ातिर। ϒ जिस शाख़ से हैं हम। आकाश की ऊँचाई पर। उड़नें की ख़ातिर। उस शाख़ से जुदा होते। लोगों को देखा है। अपनों से जुदा हुए। लोगों की याद में, इस शाख़ को… रोते देखा है। फिर भी फ़क़त मैं जुड़ा हूँ। उस शाख़ से बाकी, उस शाख़ से जुदा …