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चूहे भाई। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. चूहे भाई। ढूँढ़ कहीं से लाए रजाई, छिपकर बैठे चूहे भाई। बाहर गिरे बर्फ़ के गोले, मुश्किल से थी जान बचाई। आई मटकती चुहिया रानी, भोजन की करती तैयारी। बोली भूख लगी है भारी, ले आओ तुम फल-तरकारी। उठकर दौड़े चूहे भाई, अब तो शामत ही है आई। लानी होगी फल-तरकारी, वरना …