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प्रकृति सी निश्छल है बेटी। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ प्रकृति सी निश्छल है बेटी। ϒ घर की चहल पहल है बेटी। जीवन में खिला कमल है बेटी। कभी धूप गुनगुनी सुहानी। कभी चंदा शीतल है सुहानी। पावन गंगाजल है बेटी। प्राकृतिक सी निश्छल है बेटी। शिक्षा गुण संस्कार सिखा दो तो… आने वाला कल है बेटी। बिन बेटी है घर सूना। जैसे …