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मेरी अपनी है मंजिले। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ मेरी अपनी है मंजिले। ϒ प्यारे दोस्तों, एक घर के पास काफी दिन से एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था। वहा रोज मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चें एक – दूसरे की शर्ट पकड़कर रेल – रेल का खेल खेलते थे। रोज कोई बच्चा इंजन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे। इंजन …