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मैं क्या मेरी आरज़ू क्या। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ मैं क्या मेरी आरज़ू क्या। ϒ मैं क्या मेरी आरज़ू क्या लाखों टूट गए यहाँ। तू क्या तेरी जुस्तजू क्या लाखों छूट गए यहाँ। चश्म-ए-हैराँ देख हाल पूँछ लेते हैं लोग मिरा। क़रीबी मालूम थे हमें हम-नशीं लूट गए यहाँ। फूलों की बस्ती में काँटों से तो न डरते थे हम। सालों से …