kmsraj51.com
जब ज़िन्दा था। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ जब ज़िन्दा था। ϒ जब ज़िन्दा था तो काश तुम सीख लेती जीने का क़ायदा। शम-ए-तुर्बत१ की रौशनी में ग़मज़दा होने का क्या फ़ायदा॥ इख़्लास-ओ-मोहब्बत२ जुरूरी है मुख़्तसर३ सी ज़िंदगी में। अपना बनाने को शर्त-ए-मुरव्वत४ रखने का क्या फ़ायदा॥ सर-ए-दीवार५ रोती रह ज़ालिम मैं लौट के नहीं आने वाला। क़ब्रनशीं के साथ ख़्वाब-ए-क़ुर्बत६ …