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आज के इंसान में ही "साँप" बसता है। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ आज के इंसान में ही “साँप” बसता है। ϒ मीठा बनकर जब भी कोई डसता है। मन में ज़हर रख सामने, हमारे हँसता है॥ तो….. जाने क्यूं , साँप मुझे बहुत याद आता है, मगर, साँप काे याद करने की अब, ज़रूरत नही, क्योंकि, अब ताे हमारे सामने इंसान में ही साँप, बसता …