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मैं अकिंचन चला जा रहा हूँ। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ मैं अकिंचन चला जा रहा हूँ। ϒ मैं अकिंचन… चला जा रहा हूँ। अपने पथ पर अविलंब,अविचलित॥ लोगों की नजरों से… बचते बचाते। स्वयं में साहस बधाते॥ मन में पीड़ा व क्षोभ का ज्वार। अंगड़ाइयां लेते हुए। समाज मे अस्तित्वहीनता। व दोयम प्रकृति से बेबस होकर॥ लोगों की हेय दृष्टि से। तिल-तिल …