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कुछ दिन पहले। ⋆ KMSRAJ51-Always Positive Thinker
Kmsraj51 की कलम से….. ϒ कुछ दिन पहले। ϒ कुछ दिन पहले इस किताब में – महक रहे थे बरक नये। जिल्दसाज तुम बतलाओ। वे सफे सुनहरे किधर गये। जहाँ इत्र की महक रवां थी। जलने की बू आती है। दहशत वाले बादल कैसे। आसमान में पसर गये। बूढ़ा होकर इंकलाब क्यों – लगा चापलूसी करने। कलमों को …